पहला
प्रयोगः गुड़ और
सोंठ को पानी में मिलाकर उसकी कुछ बूँदे नाक में डालते रहने से एवं हरड़ के 1 से 3 ग्राम चूर्ण को फाँकने अथवा
सोंठ और गुड़ की गोली (2-2 ग्राम गुड़ और सोंठ में
आवश्यकतानुसार पानी मिलाकर बनायें) को चूसने से तथा मरीज को बिना तकिये के सीधा
सुलाकर उसकी नाभि से तीन अँगुल ऊपर अपने अँगूठे से दस सेकण्ड तक दबाने से हिचकी
में राहत होती है।
दूसरा
प्रयोगः शहद में
मोर के पंख की भस्म मिलाकर चाटने से हिचकी बंद होती है।
तीसरा
प्रयोगः हिचकी
बन्द न हो रही हो तो पुदीने के पत्ते या नींबू चूसें।

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