Thursday, 8 October 2015

महिलाओं की कामेच्छा को शर्तिया बढ़ा देते हैं ये 10 सुपरफूड

पौरुष बचाना चाहते हैं तो तुरंत छोड़ दीजिए ये 10 गंदी आदतें

प्‍यार करने से पहले बडे़ काम आएंगे अदरक, अंडा और शहद


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ये डायट बढ़ा सकती है आपके स्पर्म की सेहत


स्वाप्ननदोष को कैसे रोकें


Thursday, 1 October 2015

आंत्रपुच्छ शोथ (अपेन्डिसाइटिस)Appendix-


सब प्रकार के शूल रोग

पहला प्रयोगः गर्म पानी में 1-2 तोला अरण्डी का तेल पीने से आँतों का मल साफ होकर आँतों के दर्द में राहत होती है।

अम्लपित्त(Acidity) के रोग


पहला प्रयोगः एक लीटर कुनकुने पानी में 8-10 ग्राम सेंधा नमक डालकर पंजे के बल बैठकर पी जायें। फिर मुँह में उँगली डालकर वमन कर दें। इस क्रिया को गजकरणी कहते हैं। सप्ताह में एक बार करने से अम्लपित्त सदा के मिट जाता है।
आश्रम से प्रकाशित 'योगासन' पुस्तक में गजकरणी की विधि दी गयी है।

आवाज बैठ जाने पर



पहला प्रयोगः 2-2 ग्राम मुलहठी, आँवले और मिश्री का 20 से 50 मिलिलीटर काढ़ा देने से या भोजन के पश्चात् 1 ग्राम काली मिर्च के चूर्ण में घी डालकर चटाने से लाभ होता है।

पेट के रोग(Diseases of the stomach)



मंदाग्नि(Indigestion) और अजीर्ण
पहला प्रयोगः 2 से 5 ग्राम पकी निबौली अथवा अदरक में 1 ग्राम सेंधा नमक लगाकर खाने से या लौंग एवं लेंडीपीपर के चूर्ण को मिलाकर 1 से 3 ग्राम चूर्ण को शहद के साथ सुबह-शाम लेने से मंदाग्नि मिटती है। यह प्रयोग दो सप्ताह से अधिक न करें।

हिचकी(Hiccough)

नाक के रोग

नकसीर (नाक से रक्त गिरना)(Epistaxis)
पहला प्रयोगः फिटकरी का पानी बनाकर उसकी कुछ बूँदें अथवा दूर्वा के रस की या निबौली के तेल की कुछ बूँदें डालने से नकसीर में लाभ होता है।

दाँत के रोग

दादाँत की सफाई तथा मजबूतीः

पहला प्रयोगः नींबू के छिलकों पर थोड़ा-सा सरसों का तेल डालकर दाँत एवं मसूढ़ों को घिसने से दाँत सफेद एवं चमकदार होते हैं, मसूढ़े मजबूत होते हैं, हर प्रकार के जीवाणुओं का नाश होता है तथा पायरिया आदि रोगों से बचाव होता है।
मशीनों से दाँत की सफाई इतनी हितकारी नहीं है।

कान के रोग

कान में पीब(मवाद) होने परः
पहला प्रयोगः फुलाये हुए सुहागे को पीसकर कान में डालकर ऊपर से नींबू के रस की बूँद डालने से मवाद निकलना बंद होता है।

आँखों के रोग

नेत्रज्योति बढ़ाने के लिएः

पहला प्रयोगः इन्द्रवरणा (बड़ी इन्द्रफला) के फल को काटकर अंदर से बीज निकाल दें। इन्द्रवरणा की फाँक को रात्रि में सोते समय लेटकर (उतान) ललाट पर बाँध दें। आँख में उसका पानी न जाये, यह सावधानी रखें। इस प्रयोग से नेत्रज्योति बढ़ती है।