पहला
प्रयोगः एक लीटर कुनकुने पानी में 8-10 ग्राम सेंधा नमक
डालकर पंजे के बल बैठकर पी जायें। फिर मुँह में उँगली डालकर वमन कर दें। इस क्रिया
को गजकरणी कहते हैं। सप्ताह में एक बार करने से अम्लपित्त सदा के मिट जाता है। आश्रम से प्रकाशित 'योगासन' पुस्तक में गजकरणी की
विधि दी गयी है।
पहला
प्रयोगः2-2 ग्राम मुलहठी, आँवले और मिश्री का 20 से 50 मिलिलीटर काढ़ा देने
से या भोजन के पश्चात् 1 ग्राम काली मिर्च के चूर्ण में घी डालकर
चटाने से लाभ होता है।
पहला
प्रयोगः2 से 5 ग्राम पकी निबौली अथवा अदरक में
1 ग्राम सेंधा नमक लगाकर खाने से या लौंग एवं लेंडीपीपर के
चूर्ण को मिलाकर 1 से 3 ग्राम चूर्ण को शहद के साथ
सुबह-शाम लेने से मंदाग्नि मिटती है। यह प्रयोग दो सप्ताह से अधिक न करें।
नकसीर (नाक
से रक्त गिरना)(Epistaxis) पहला
प्रयोगःफिटकरी
का पानी बनाकर उसकी कुछ बूँदें अथवा दूर्वा के रस की या निबौली के तेल की कुछ
बूँदें डालने से नकसीर में लाभ होता है।
पहला प्रयोगः नींबू के छिलकों पर थोड़ा-सा सरसों का तेल डालकर दाँत एवं
मसूढ़ों को घिसने से दाँत सफेद एवं चमकदार होते हैं, मसूढ़े मजबूत होते हैं, हर प्रकार के जीवाणुओं का नाश
होता है तथा पायरिया आदि रोगों से बचाव होता है। मशीनों
से दाँत की सफाई इतनी हितकारी नहीं है।
पहला प्रयोगःइन्द्रवरणा (बड़ी इन्द्रफला) के फल को काटकर अंदर से बीज निकाल
दें। इन्द्रवरणा की फाँक को रात्रि में सोते समय लेटकर (उतान) ललाट पर बाँध दें।
आँख में उसका पानी न जाये, यह
सावधानी रखें। इस प्रयोग से नेत्रज्योति बढ़ती है।